पाकिस्तान के फारूकाबाद स्थित 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा को ध्वस्त किए जाने संबंधी तथ्य, पृष्ठभूमि एवं भारतीय जनता पार्टी का पक्ष
पाकिस्तान के फारूकाबाद स्थित 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा को ध्वस्त किए जाने संबंधी तथ्य, पृष्ठभूमि एवं भारतीय जनता पार्टी का पक्ष
लुधियाना 4 जुलाई (मनजीत सिंह रोमाणा) भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष रजनीश धीमान ने भाजपा कार्यालय में कुछ सीनियर कार्यकर्ताओं के साथ विचार विमर्श करते हुए कहा कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के जिला शेखूपुरा अंतर्गत फारूकाबाद (पूर्व नाम चूहरकाना) स्थित लगभग 125 वर्ष पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा को बीते दिनों कथित रूप से भू-माफिया द्वारा स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से ध्वस्त कर दिया गया। इस घटना ने समूचे सिख समुदाय में गहरी चिंता पैदा की है तथा भारत सरकार ने भी इस मामले पर कड़ा कूटनीतिक विरोध दर्ज कराया है।
1. ऐतिहासिक महत्व
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सिख इतिहास के महत्वपूर्ण सिंह सभा आंदोलन का प्रतीक है।
सिंह सभा आंदोलन की शुरुआत वर्ष 1873 में श्री अमृतसर साहिब से हुई थी, जिसका उद्देश्य सिख धर्म की मूल परंपराओं की रक्षा, धार्मिक जागरूकता, शिक्षा का प्रसार तथा सिख पहचान को सुदृढ़ करना था। फारूकाबाद स्थित यह गुरुद्वारा उसी ऐतिहासिक आंदोलन की स्मृति में स्थापित किया गया था और लगभग सवा शताब्दी से सिख विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है।
महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल में यह क्षेत्र चूहरकाना के नाम से जाना जाता था, जिसे विभाजन के बाद फारूकाबाद नाम दिया गया।
2. विभाजन के बाद की स्थिति
वर्ष 1947 के विभाजन के बाद अधिकांश सिख परिवार भारत आ गए। इसके पश्चात यह गुरुद्वारा पाकिस्तान के Evacuee Trust Property Board (ETPB) के अधीन चला गया। समय के साथ इसकी देखरेख में लापरवाही बढ़ती गई और यह ऐतिहासिक इमारत उपेक्षा का शिकार होती रही।
3. ताज़ा घटनाक्रम
24 जून की रात कथित रूप से कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों और भू-माफिया ने स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से इस ऐतिहासिक इमारत को ध्वस्त कर दिया।
महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि स्थानीय सिख समुदाय ने पहले ही प्रशासन को लिखित रूप से इसकी जानकारी दी थी तथा गुरुद्वारे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की थी, किंतु इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
घटना के सार्वजनिक होने के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज़ शरीफ तथा संबंधित प्रांतीय मंत्री ने जांच के आदेश दिए और गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया है। किंतु सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि समय रहते इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
4. भारत सरकार का रुख
भारत सरकार ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने इसे "एक सम्मानित सिख धार्मिक स्थल के विरुद्ध पूर्व नियोजित तथा अत्यंत निंदनीय तोड़फोड़ की कार्रवाई" बताया है।
भारत ने पाकिस्तान के समक्ष कड़ा कूटनीतिक विरोध दर्ज कराते हुए दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई, ऐतिहासिक गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण तथा पाकिस्तान में स्थित सभी सिख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
5. भारतीय जनता पार्टी का पक्ष
भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है।
पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि "यह घटना पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के प्रति उसके दोहरे रवैये को उजागर करती है।" उन्होंने आरोप लगाया कि भू-माफिया और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से सिख विरासत को निशाना बनाया गया है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य तरुण चुघ ने इसे "पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के इतिहास और विरासत को मिटाने की गहरी साजिश" बताया। उन्होंने भारत सरकार से इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाने की अपील की।
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा द्वारा इस घटना के विरोध में विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन भी किए गए हैं।
6. व्यापक चिंता
यह कोई अकेली घटना नहीं है। पाकिस्तान में अनेक ऐतिहासिक गुरुद्वारे, मंदिर तथा अन्य गैर-मुस्लिम धार्मिक स्थल लंबे समय से उपेक्षा, अवैध कब्जों, भू-माफिया की गतिविधियों तथा प्रशासनिक लापरवाही का शिकार होते रहे हैं।
कई धार्मिक स्थलों को व्यावसायिक परिसरों, दुकानों अथवा अन्य उपयोगों में परिवर्तित किए जाने के आरोप भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। यह स्थिति पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक एवं सांस्कृतिक अधिकारों को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
7. भारतीय जनता पार्टी की प्रमुख मांगें
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा का उसके मूल स्वरूप के अनुरूप तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए।
ध्वस्तीकरण की घटना में शामिल भू-माफिया, संबंधित अधिकारियों तथा अन्य दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
पाकिस्तान में स्थित सभी ऐतिहासिक गुरुद्वारों, मंदिरों तथा अन्य अल्पसंख्यक धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
सिख एवं हिंदू समुदाय के धार्मिक, सांस्कृतिक तथा मानवाधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी एवं ठोस कदम उठाए जाएं।
यूनेस्को (UNESCO), संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस मामले का संज्ञान लेकर पाकिस्तान पर अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का पालन सुनिश्चित करने हेतु दबाव बनाएं।
8.जिला अध्यक्षों हेतु मुख्य संदेश (Talking Points)
यह केवल एक इमारत को गिराने की घटना नहीं, बल्कि सिख इतिहास और विरासत पर सीधा हमला है।
भारत सरकार ने तत्काल कूटनीतिक स्तर पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
भारतीय जनता पार्टी विश्वभर में सिख एवं हिंदू धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, संरक्षण और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है।धार्मिक विरासत का संरक्षण प्रत्येक सभ्य राष्ट्र का नैतिक और अंतरराष्ट्रीय दायित्व है।
पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों के अधिकारों एवं उनकी धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत की रक्षा संबंधी अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए।इस मौके पर जिला महामंत्री सरदार नरेंद्र सिंह मल्ली,यशपाल जनोत्रा, जिला उपाध्यक्ष महेश शर्मा, डाक्टर निर्मल नय्यर,प्रेस सचिव डा. सतीश कुमार,सरदार तरनजीत सिंह,सुरिंदर सिंह विरदी,हरजोत सिंह किट्टी, अमरीक सिंह मिका, गुरमुख सिंह, विजय कुमार बयाला इत्यादि मौजूद थे।
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